Know About Astrology

ज्योतिष (Astrologer) का सबसे बड़ा धर्म /कर्तव्य यह है कि वो व्यक्ति को उसकी कुंडली या हस्तरेखा देखकर ग्रहों के दुष्प्रभाव के कारण भविष्य में होने वाले दुर्घटनाओं ,खतरों ,तकलीफों ,बिमारियों के प्रति आगाह करें ताकि उचित समाधान एवं सलाह बताकर उन्हें होने वाले तकलीफों ,संघर्षों को कम करें साथ ही भविष्य में घटने वाली शुभ घटनाओं के बारें में बताकर व्यक्ति को प्रोत्साहित करें एवं उन्हें सुख कि अनुभूति प्रदान करें |

 अगर सही-सही हस्तरेखा ,कुंडली या नाम के अक्षरों का विश्लेषण कर आवश्यकतानुसार रत्न/पत्थर/अंगूठी पहना जाये या अन्य ज्योतिषिये उपाय किया जाय तो निश्चित रूप से व्यक्ति का तक़दीर चमक सकता है और वो भाग्यशाली बन सकता है |

ज्योतिष कभी भी व्यक्ति को कर्म विमुख नहीं बनाता ,बल्कि ज्योतिष शास्त्र खुद व्यक्ति के कर्म पर ही आधारित है | ज्योतिष विद्या वो हथियार है जिसके द्वारा आप अपने जीवन में कई आश्चर्यजनक सकारात्मक परिवर्तन ला सकते है ये ज्योतिष विद्या आज तक ,इस वैज्ञानिक युग में भी पहेली बनकर अपने मूल रूप में विद्यमान है |ज्योतिष विद्या का उद्गम कहाँ से है इसकी ज्योतिष इसीलिए ज्योतिष को वेद का नेत्र कहा गया है| इसके अलावे स्कंद्पुराण ,सुर्यपुराण ,भविष्यपुराण ,अग्निपुराण महाभागवत पुराण,लिंग पुराण ,पद्मपुराण शिवपुराण एवं विभिन्न धार्मिक /ज्योतिष ग्रंथों में भी ज्योतिष ज्योतिष का संहिता इत्यादि |अब बतायें क्या ज्योतिष विद्या आधार रहित है| इसी कारण आप माने या न मने भारतवर्ष में अभी भी प्रत्यक्ष रूप से 40% (50 करोड़ लोग ) जनता ज्योतिषी से एवं पंडितों से जुड़ें हुए हैं इससे अलग होना संभव नहीं है | अतः आप घरेलू पंडितों ,ब्राह्मणों के माध्यम से जाने -अनजाने ज्योतिष का लाभ तो उठा ही रहे हैं तो सीधे ज्योतिषी से जुड़ने में क्या हर्ज है |

 

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